संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश है अर्थात् शारीरिक आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना ऋषि दयानन्द द्वारा प्रणीत यह वाक्य वर्तमान में सभी शिक्षाविदों के लिए चिन्तनीय है क्या वर्तमान में इस प्रकार की शिक्षा प्रणाली उपलब्ध है । जो बच्चों का शारीरिक, आत्मिक एवं सामाजिक विकास करती हो । आज का युग विज्ञान युक्त बात को करता है परन्तु उसके अन्दर आत्मविश्वास का भी अभाव प्रतीत होता है । जिसके कारण वह युवा अन्धविश्वास का भी सहारा लेता है । आज का युवा बुद्धिमान तो है परन्तु शरीर से दुर्बल भी है । आज के युवा को अपनी उन्नति हेतु लाखों का धनलाभ तो मिलता है, परन्तु देश-पितृ-मातृभक्ति का भी अभाव दृष्टिगोचर है अर्थात् कहीं न कहीं आधुनिक शिक्षा प्रणाली में इस प्रकार की शिक्षा का अभाव है । ऋषि दयानन्द गुरुकुल परम्परा के माध्यम से विद्यार्थी के जीवन में शारीरिक, आत्मिक, सामाजिक उन्नति करना चाहते हैं क्योंकि गुरुकुल वह स्थान है जहाँ विद्यार्थी अहर्निशम् आचार्य के नेतृत्व में अपने जीवन को प्रगति की और अग्रसर करता है ओर आचार्य का भी उत्तरदायित्व होता है कि वह विद्यार्थी की व्यवस्थित दिनचर्या से उसका सूक्ष्म निरीक्षण कर उसका सर्वांगीण विकास करें । ऋषि दयानन्द के गुरु, गुरु विरजानन्द जी की जन्म स्थली करतारपुर है और इसी भूमि पर गुरु विरजानन्द गुरुकुल महाविद्यालय, गुरु विरजानन्द स्मारक समिति ट्रस्ट, करतारपुर द्वारा संचालित है । आधुनिक तकनीकों का समुचित प्रयोग, व्यवस्थित दिनचर्या, कुशल प्रशासन, योग्य आचार्यों द्वारा प्रशिक्षण, सम्पूर्ण निःशुल्क व्यवस्था आदि इस गुरुकुल का प्रमुख आकर्षण है । हमारा उद्देश्य छात्रों का सर्वीगीण विकास एवं व्यक्तित्व निर्माण करना है । 2019-20 सत्र हेतु सभी नये एवं पुराने छात्रों का मैं हार्दिक अभिनन्दन एवं स्वागत करता हूँ तथा आशा करता हूँ कि गुरुकुल के नियमों का पालन करते हुए अपनी सर्वांगीण उन्नति करेगें तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभायेंगे पुनः. पुनः शुभकामना एवं शुभाशीष ।


प्राचार्य

डॉ. उदयन आर्य

गुरु विरजानन्द गुरुकुल महाविद्यालय,

करतारपुर-144801 जिला-जालन्धर (पंजाब)